Sunday, 5 June 2016

# 32 तेरी यादों के साए में जिए जा रहा हूँ

# 32
तेरी यादों के साए में जिए जा रहा हूँ
खुद अश्क़ अपने पीये जा रहा हूँ
खलिश से अपनी ज़िल्ल् बचाकर
उस रश्केमेहर की खातिर पारसाई हुए जा रहा हूँ....

जानता हूँ वो मेरी नहीं
अब उसकी परछायी लिए जा रहा हूँ
हकीकत से उसको सिये जा रहा हूँ

यादो का कारवां है साथ मेरे
तपती रेत पर यूं चले जा रहा हूँ

शुक्र करूँ, सब्र करूँ, के फिक्र करूँ?
जुदा हो के भी उसको साथ लिए जा रहा हूँ
उलझा उसके काकुले पेचाँ में इस कदर
अंधेरों को चराग किए जा रहा हूँ
उस जिस्म की खुश्बू से रूह को महका रहा हूँ
खिज़ाओं को गुलशन किए जा रहा हूँ

अब हर तरफ तू ही तू है
मैं आईने से शिकवा किए जा रहा हूँ
खुदी को खुद से बहला रहा हूं
तुम्हारी ज़रुरत कम किये जा रहा हूँ

माना अब हम नदी के दो किनारे है
पानी का हाथ पकड़ साथ लिए जा रहा हूँ
कर लिए कई मरहले पार फिर भी,
एक आस लिए जीए जा रहा हूँ।

दास्ताने मोहब्बत लिखी भी तो लहरों पर
कश्ती हिचकोले खाती लगेगी किनारे पर
जिन हर्फ़ओ पे कल एक नज़्म थी उनको उड़ा रहा हूँ

जिन्दगी हर एक साँस पे जीये जा रहा हूँ ..
नाम सिर्फ तेरा लिए जा रहा हूं...
तेरी यादों के सायों को बहला रहा हूँ...

( रश्केमेहर - More dazzling than the Sun,सूर्य से भी सुन्दर प्रेयसी,पारसाई - self restraint,
काकुले पेचाँ - घुंघराले बाल)

(~सहभागिता - उत्कर्ष सिंह सोमवंशी,राजेश सिक्का,अंजली ओझा ,आनंद खत्री,विकास त्रिपाठी,मो.शब्बीर,फर्रुख नदीम,गुंजन अग्रवाल,अनिता शर्मा )


30/03/16



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