नव ओज,नव सोच और ऊर्जा नयी है
माँ के आगमन से उल्लासित भोर हुई हैमिटे कष्ट सब फैला हर सू उजाला
नवल दिव्य छवि माँ का दर्शन निराला!
नव भाव नयी सोच का आरंभ तुम्ही हो
दिव्य हैं माँ के दर्शन जगमग है देवाला
देव-शक्ति, मनुष्य-मूल का सूत्र तुम्ही हो
तुम्हीं आदि शक्ति तुम्ही कल्याणी हो
वन्दना-प्रसंग, प्रजा का वन्द-प्रसार तुम्ही हो
अन्न दायिनी श्वेत वस्त्र धारिणी मातु भवानी तुम्ही हो
विचार का साकार, दृष्टि को आकार तुम्ही हो
शक्ति प्रदायिनी ,सर्व सुख दायिनी
मंगल कारिणी, रिपु दल हारिणी तुम्ही हो
सूत्र जगी शक्तियां, उत्पीड़ितों का दर्द भी
अपराध-दोष को क्षम्य-याचना भी तुम्ही हो।
~ अनिता शर्मा , सरोज सिंह परिहार, सुधीर पान्डे, अल्पना नागर, माधुरी स्वर्णकर, चारु अग्रवाल, आनन्द खत्री
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