Friday, 29 April 2016

# 76 . सह भागिता हरिवंश राय बच्चन ~ चुपके से चाँद निकलता है

"कुछ काल सभी से मन बहला, आकाश सभी को छलता है"

"सोना चाँदी हो जाता है,
जस्ता बनकर खो जाता है,
पल-पहले नभ के राजा का अब पता कहाँ पर चलता है।
चुपके से चंदा ढ़लता है।" ~ हरिवंश राय बच्चन (चुपके से चाँद निकलता है)


रह-रह दरवाज़े की आगल को
आभास अंजोर का रहता है
चेहरा तेरा भी तकिये पर कुछ धुंधला-धुंधला दिखता है
दिन धीरे धीरे जलता है


ओढ़ थकन दिन भर की शब्
हर रोज़ झरोखे पर आकर
चुप चाप मुझे ही तकता है
कुछ कहता है न सुनता जब चुपके से चाँद निकलता है
बस खोया खोया रहता है


जब खो जाता है चैन कहीं
और नींद नहीं जब आती है
तन्हाई में दीदार मेरा, करने को खूब तड़पता है
पर जाग न जाए रात कहीं
आहें भरता है डरता है


चांदनी पिघलने लगती ज्यों
नदिया जैसी लहराती है
अरुणामयी शामें कुमकुम सिंदूरी सूरज बिंदिया है
संध्या के भाल चमकता है


बदली का रंग भी काला सा
चुभता अंतस में भाला सा
कहारता है नयनों से किन्तु अधरों से सहज रहता है
मन ही मन में पिघलता है


अलसाई आँखो का कोना..
जैसे बात बिना ही रोना..
नही सजन आये है अबतक, फिर आँचल क्यूँ ये गिरता है
चुपके से चाँद निकलता है


रातों की मधु का ख़ुमार सखी
उल्लास सुबह की सिन्दूरी
आखों के गीड़ से सनकर भी
एक सहर अपूर्व चाहत में बयार ले कर निकलता है
पर अतीत से नाते रखता है


सागर की लहरों में डूबा
हर शाम को सूरज होता है
अरूणोदय काली रातो को हर प्रथम रश्मि से खोता है
सपनों में रंग भरता है


सूरज अलमस्ती मे झूम झूम
धरती का कण कण चूम चूम
देखो कैसी बेफिक्री से हर रोज ही खूब मचलता है...
धरती का रंग बदलता है


रजनीगंधा रात महकती
रविप्रिया उषा खनकती है
कण- कण भर आस का सृष्टि जाग्रत नव सृजन को उमगती है
रूकता कब रथ सप्त अश्व वाला है


पंक्षी नभ मे गाते है
सब इधर उधर मँडराते है,
तारों से जगमग रात रात ढले
आकाश के चित्र पटल पे वो अकिंत यादें कर जाते है
सूरज हर रोज निकलता है

(सह-भागिता : पूजा श्रीवास्तव कनुप्रिया, सरोज सिंह परिहार, अनिता शर्मा, आनन्द खत्री, गुंजन अग्रवाल 'चारू', पूजा बंसल, सुधीर पांडे, उत्कर्ष सिंह सोमवंशी)




Monday, 25 April 2016

सह -भागिता # 27 -अक्स में ढूंढते हो क्या



अक्स में ढूंढते हो क्या
धुंआ-धुंआ हुआ चेहरा मेरा
रात धुले काजल की बिखरी लकीरें
आँखों में छिपी अनगिनत तस्वीरें

आंखें रखती हैं तेरा तारीफ-ए-बयां
यादों के मंजर सा बढ़ता कारवां

खिंचती नकेल, खुरों में रेत, सफर बेज़ुबां
दर-दर भटकता साया मेरा

खोया हुआ हम-साया मेरा
झलकते मिराज़ में ख्याल बदगुमान

लम्हा- लम्हा छूटता मुझसे 'मैं'
अब मेरा सहारा साकी और मय,

होली के फीकेपन से उभरता असल चेहरा
हर शक्स के सीने में दबा राज़ गहरा

अक्स में ढूंढते हो क्या
धुंआ धुंआ हुआ चेहरा मेरा


(सहभागिता - आनंद खत्री ,गुंजन अग्रवाल'चारू',अनिता शर्मा,राजेश सिक्का )




26/03/16

Sunday, 24 April 2016

सह भागिता #17- चींटी को आटा डालते बाबा के चेहरे की ख़ुशी



चींटी को आटा डालते बाबा के चेहरे की ख़ुशी
भूखों को खाना खिलाने की ख़ुशी

ख़ुशी से रूबरू होते गमों की बेरूखी
छप्पर से झांकती कतरा कतरा धूप सी ख़ुशी

मयकशीं आँखों को देख खाली प्यालों की ख़ुशी
जाम के फिर भर के छलक जाने की ख़ुशी

बिटिया की मांग में दमकती सिंदूरी ख़ुशी
हाथ में मेहंदी रच जाने की ख़ुशी

दाने चुग कर चहचहाती चिड़ियों की ख़ुशी
किसी के लौट आने की ख़ुशी

अंधेरे की रोशनी से हारने की ख़ुशी
अंधेरों में खुश्बू की क़ियादत की ख़ुशी

नज़रों से हुई इबादत की ख़ुशी
नज़रों को पढ़ मुस्कुराते लबों की ख़ुशी

तुमसे मिली हुई सारे ग़मों की ख़ुशी
रास्ता है सफर ज़िन्दगी हर ख़ुशी

शाम को समोसे के साथ चाय की ख़ुशी
पाकिस्तान से मिली जीत की ख़ुशी

थोड़े से प्यार और ज़्यादा सी मोहब्बत की ख़ुशी
सबको खुश देख कर खुश होने की ख़ुशी

दोस्तों की ख़ुशी अपनी ख़ुशी
इसी ख़ुशी में छुपी है सबकी ख़ुशी

श्वेत श्याम से रंगीन होती ख़ुशी
खुशी के बीज छिड़क,खुशी बोने की ख़ुशी...


(सह-भागिता - आनंद खत्री, अनिता शर्मा, राजेश सिक्का, विकास त्रिपाठी, फ़र्रुख नदीम,मो.शब्बीर)


20/03/16



सह-भागिता # 26 - वो हसीं मौसम, इबादत-रात और तुम



वो हसीं मौसम, इबादत-रात और तुम
सर्द हवाएं भीगे से जज्बात और तुम
बदलते मौसम एक सौगात और तुम
खनकती चूड़ियाँ तुम ख्याल और तुम
ख्याल मनुहार आया बुखार और तुम
न हो तुम और फिर भी मुझमें तुम
मेरे जीने की वजह बस तुम ही तुम
इश्क़ में हम और मोहब्बत में तुम
दूर भी तुम और पास भी तुम
उजागर हो गये जस्बात बेबात और तुम
छूये नर्म निगाहों से मेरे जज़्बात, रात और तुम
मुकम्मल हो गयी सभी फ़रियाद और तुम ..
गुज़रती रातों वो तारों की बारात और तुम...
रेगिस्तानी मृगतृष्णा से होकर भी नहीं तुम


(सह-भागिता - आनंद खत्री,अनिता शर्मा,गुंजन अग्रवाल 'चारू' ,रिपुदमन मागों ,राजेश सिक्का,विकास त्रिपाठी,उत्कर्ष सिंह सोमवंशी)


25/03/16


सह-भागिता #25 - एक आग सी है सीने में



एक आग सी है सीने में
जलती रही हरदम, बुझती नहीं...

खहिशों के तलातुम सी
सुलगती है, पर मचलती नहीं

सहज है, पर सुलझने में
बीतती है, बिसरती नहीं...

दरिया न बन जाये शोलों का कहीं
नब्ज़ देख चरागार उदास भी नहीं

एक ग़ुबार सा कुछ उठता है
इस दर्दे दिल की दवा भी नहीं

लगता है उसे न परवाह थी कभी
टूटा है जो अंदर, वो चुभता भी नहीं...

ढूंढता हूँ, पर दिखता क्या कभी
दिल-ए-आवाज़ हूँ, वो सुनता भी नहीं...

बन खुशबु महकता है मुझमें कभी,
तेरी यादों का, गुलदस्ता भी नहीं....

चाहे जब चुरा लो मुझसे,
सब तेरा है मेरा कुछ भी नहीं...

एक आग सी सुलगती है सीने में
पर धुंए के परे, कुछ भी नहीं.........

(सह-भागिता- विकास त्रिपाठी, गुंजन अग्रवाल 'चारू' , राजेश सिक्का, आनंद खत्री, अनिता शर्मा)
25/03/16



सह-भागिता # 24 - मन मृदंग हुआ, तन कसा सितार



मन मृदंग हुआ, तन कसा सितार
घर आया मेरे सज धज के रंगीला त्यौहार...

ख्वाइशों का नाद हुआ फाग की पुकार
वीणा बन ताल पे नाचे है जैसे झाँझ सितार...

राधा संग कृष्ण उड़े गुलाल अबीर की धार
काशी में खेले मथुरा में खेले मन का घर संसार...

कुछ तो करीब आओ करें मनुहार,
मुझको रंग दो अपने ही रंग में एक बार...

चिरयौवना के हों जाए सोलह श्रृंगार
हर एक श्रृंगार में छिपे रूप हज़ार


(सह-भागिता -रिपुदमन मागों,राजेश सिक्का,उत्कर्ष सिंह सोमवंशी, अनिता शर्मा,आनन्द खत्री)


24/03/16


सह-भागिता #23 - आख़िर एक दिन हम खुदा से मिले



आख़िर एक दिन हम खुदा से मिले
जाने किस मोड़ पे हम ख़ुदा से मिले

दिल में लिए थे कई शिकवे गिले
दर्द के लेकर सिले ख़ुदा से मिले

गला भरा सा था अश्क़ बस बहते रहे
बेआवाज़, बे-कसक हम ख़ुदा से मिले

होली पर मिलो गले, न रहे शिकवे गिले
रंग रेज़ हथेलियों में मिले हम खुदा से मिले

लब रहे खामोश क्यूँ जब खुदा से मिले
फाग गा रहे थे जब मिले खुदा से मिले

हाथ लकीरों लिए अब खुदा से गिले
ज़िक्र तेरा ही लेकर हम खुदा से मिले

मिटा कर हसरत ज़रुरत के सिलसिले
खुद को सौप दिया जब खुदा से मिले

वो खुदा है यह जाना कब जब उससे मिले
एक दूसरे को बनाने वाले खुदा से मिले

निकल गए थे बहुत दूर, खुद से बेख़बर
खुद की खबर मिली जब खुदा से मिले

(सह-भागिता- आनंद खत्री,गुंजन अग्रवाल 'चारू' ,विकास त्रिपाठी,अंजलि ओझा,अनिता शर्मा,राजेश सिक्का,रिपुदमन मागों,झिलमिल जैन)


23/03/16