अक्स में ढूंढते हो क्या
धुंआ-धुंआ हुआ चेहरा मेरा
रात धुले काजल की बिखरी लकीरें
आँखों में छिपी अनगिनत तस्वीरें
आंखें रखती हैं तेरा तारीफ-ए-बयां
यादों के मंजर सा बढ़ता कारवां
खिंचती नकेल, खुरों में रेत, सफर बेज़ुबां
दर-दर भटकता साया मेरा
खोया हुआ हम-साया मेरा
झलकते मिराज़ में ख्याल बदगुमान
लम्हा- लम्हा छूटता मुझसे 'मैं'
अब मेरा सहारा साकी और मय,
होली के फीकेपन से उभरता असल चेहरा
हर शक्स के सीने में दबा राज़ गहरा
अक्स में ढूंढते हो क्या
धुंआ धुंआ हुआ चेहरा मेरा
(सहभागिता - आनंद खत्री ,गुंजन अग्रवाल'चारू',अनिता शर्मा,राजेश सिक्का )
26/03/16

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