उसके दर पे क्यों सजदे करता है...
आखिर वो है कौन? तेरा क्या लगता है?
शिकायत में सही ज़िक्र रोज़ होता है,
इक इक शिकवा,प्रीत का इजहार रखता है...
मुझे मोहोब्बत है ये इकरार करता है...
नाम ले लो अगर, फिर शर्मसार हो जायें,
चलो आज फिर, बदनाम हो जायें ...
शहर में चर्चा आम हो जाये,
चलो बिकते है, शायद किसी को आराम हो जाये ...
मोल है "मैं", जो तू खरीदार हो जाये,
कुर्बान ये दिल बार बार हो जाए.
तू जिसको मिले है वो तो मालामाल हो जाए,
पाई पाई की चोरी हलाल हो जाये ...
चल दरिया में डूबे, सोहनी-महिवाल हो जाये,
हर एक ज़ुबां में हमारा नाम आ जाए....
हाल-ए-हसरत कोई कमाल हो जाए...
है दिल के दरमियान कोई समुन्दर कहीं देख
ये साहिल पे टूटने का इक़बाल करता है
(~सह-भागिता - विकास त्रिपाठी, राजेश सिक्का, अनिता शर्मा, अंजलि ओझा, आनंद खत्री)
18/03/16

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