Sunday, 24 April 2016

सह-भागिता #22- घुला दो नफ़रतें सभी रंगों में होली के



घुला दो नफ़रतें सभी रंगों में होली के
बदल रहा है मौसम रंगों में होली के

लगे नार नखरेदार पड़ोसन रंगों में होली के
टेसू रहे तलबगार तेरे रुखसार रंग में होली के

दे दो रंग लबों का उधार, मिला लें रंगों में होली के
भीगे लिबास में सहलाब मिलेंगे रंग होली के

रंग चुराये है गुलाल तेरे गालों से रंग में होली के
चंदन का लम्स इत्र तेरा साथ रंग होली के

पी के भंग नाचो गाओ उड़ाओ रंग होली के
उल्टे पांव लौटी उमरिया देख के रंग होली के

भीगी चुनरिया झीनी रंगों में होली के
अंग अंग फागुन हुआ, जो पिय ने डाले रंग होली के

आसमान भी रंगीन हो गया जब रंग उछाले होली के
 नये पात नये गान्थ रंग में होली के

बेकाम हैं औपचर सभी रंगों में होली के
पिघल रहा है अंतर्मन रंगो में होली के

ग़ज़ल हो रहा है संग रंग में होली के
योगिया बोले सारा रा रा रंग में होली के

धू-धू के चिलम खींच चरसी रंग में होली के
जला के माज़ी सारा नाचे रंग में होली के

सज़ा काट के आया है ३६४ दिन होली के
आया है आज दिन भीगे रंग में होली के


(सह-भागिता - आनंद खत्री, अनिता शर्मा, गुंजन अग्रवाल "चारू" ,विकास त्रिपाठी, राजेश सिक्का)


23/03/16



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