पुराने इश्क़ में ये दर्द नया सा क्या है
जल गया जो सब तो बचा सा क्या है
उनको खबर तक ना हुई खाक होने की
कोई बतलाये हमें भी ये माजरा क्या है
रुसवा न होने दिया तुमको कभी यूँ हमने
हाल-ए-दिल को अगर है तो आसरा क्या है
ना तुम कुछ पूछना ना हम बताएँगे उलझन
कहने सुनने को दरमियाँ अब बचा क्या है
गुलों की राह में क्यों खार सजाते हो तुम
एक नाचीज़ से दिल जलता रहा क्या है
सोचकर लगाया जो दिल, वो इश्क़ ही क्या है
तुझ से आखिर मेरा अब रिश्ता क्या है
चलो फिर अजनबी बन जाओ, ख्वाबों में ना आना
झुकी नजरों की तस्लीम का फ़लसफ़ा क्या
आँख नम हुई है शायद तेरी, बारिश है...
ग़म-ए-दिल से कोई पूछना कि आसरा क्या है...
एक कश्ती लिख जाना उम्मीदों की नाम मेरे
समंदर है ख़यालों का, तो अब डूबना क्या है
आओ, एक ग़ज़ल की पतवार बनाते हैं
कुछ पल साथ मिलकर रूठना क्या है
कुछ तुम्हारी सुनते, कुछ अपनी बताते हैं .
कहो बेताब क्यों था काजल बहा क्या है
(सह-भागिता - अनिता शर्मा ,फ़र्रूख़ नदीम, गुंजन अग्रवाल 'चारू' , आनंद खत्री, राजेश सिक्का, अंजलि ओझा)
16/03/16
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