Saturday, 23 April 2016

सह-भागिता #12 - अतुल्य तुमको मेरी ज़रुरत क्यों हो



अतुल्य तुमको मेरी ज़रुरत क्यों हो
जो नहीं मिलता उसकी चाहत क्यों हो

जो साथ नहीं उसकी आदत क्यों हो
खाक हो तुम तो इबादत क्यों हो

रास्ता बादलों का संग नदी के ठहरा
बिन मौसम यहाँ बरसात क्यों हो

सुरमई अंखियों पर आँसूओं का पहरा
काजल डाल ले जो वो, तो ढलती रात क्यों हो

आखरी बूँद तक बोतल की ज़रुरत क्यों हो
अपना है वो फिर भी अजनबी सी मुलाकात क्यों हो

हर मुलाकात का ज़िक्र औ शिनस क्यों हो
दिल पत्थर है,तो दिखावे को आँख समन्दर क्यों हो

तू मेरा नहीं इस बात का यकीन तो हो
मेरे यकीन को लहर-ए-समंदर क्यों हो

कही मझदार में शिकवा हो कश्तियों से क्यों
मुझे डूब जाने को, साहिल की ज़रूरत क्यों हो


(~सह-भागिता - अंजलि ओझा, आनंद खत्री,अनिता शर्मा, गुंजन अग्रवाल 'चारू' , राजेश सिक्का, फ़र्रुख़ नदीम)


18/03/16



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