२१२-२१२-२१२-२१२
काफ़िया : स्वर आ
रदीफ़ : याद है
१.
सर पे साया सा दस्ते दुआ याद है
आख़री वक्त की वो तेरी सदा याद है
कांपते होठ वो देखना एक-टक
किस मुलाक़ात का दिन पता याद है
शाम की हसरतों का सिरा ढूंढता
न खुदा और न नाखुदा याद है
बद-नसीबी को आसमां ज़रा दूर था
आँख से जो आंसू गिरा था याद है
बिन बताये ही आएगी एक दिन ये अज़ल
काठ को लौ-लहर हर अदा याद है
धूप में रहता है साये के जैसा जो
सांस की साँझ पर बिछड़ना याद है
बीती उस शाम की हर फ़िक्र शुक्रिया
अब न सहरा, न ज़ुल्मे-क़ज़ा याद है
रुकते बढ़ते कदम जब न रुक के थमे
आसमां उड़ क्षितिज अटकना याद है
बेसब्र बाद बे-वजह नज़दीकियां
बरखा में घर मे मेरा जला याद है
टूटकर देखना वो समा बारहा
बीतना वो कहर हर कज़ा याद है
~ सह-भागिता #51 बशीर-बद्र ( सूरज राय सूरज, सुधीर पांडेय, सरोज सिंह परिहार, चारु अग्रवाल, अनिता शर्मा ,आनन्द खत्री )
२.
अपने आँगन में इक पेड़ था याद है
आसरा था उसी साथी का याद है
छांव में बैठ कर काटना दोपहर
मेढ़ नाखून से खुरचना याद है
गुनगुनी धूप छन छन पत्तों से वो
वो बिनौले सेमल के, हवा याद है
ओस को छेड़ती सर्दि की धूप भी
और तुझसे मेरा झगड़ना याद है
गर्मियो की रात मे छत पे लेटे लेटे
देर तक चांद से बाते करना याद है
रात आती गुजर जाती बिन तेरे जब
सिसकियों की तरह सिसकना याद है
~ सह-भागिता #54 बशीर-बद्र( सुधीर पांडेय, सरोज सिंह परिहार, चारु अग्रवाल, विकास त्रिपाठी ,आनन्द खत्री )
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