Saturday, 23 April 2016

# 61 a.गुलज़ार साहब की कविता : "ये कैसी उम्र में आ कर मिली हो तुम" पे सह भागिता का अनु-नाद - १. सरोज सिंह परिहार -सूरज




उम्र का  क्या है

उम्र तो गुजरती ही है लेकिन ....

सुना .है प्यार की कोई उम्र नहीं होती

प्यार तो बस हो जाता हे ...

उम्र के किसी भी मोड़ पर...

जब तुम बोओगे आँखों की फसल...

तो बंजर ज़मीन पर भी उगेंगे

मेरे हजार चेहरे... और देखना.,,

प्यार की तपिश से बरसेंगे बादल....

हमें क्या लेना देना किसी के

हिस्से की मिट्टी से..धूप से ....

एहसास की मिट्टी में जज्बात की तपिश

काफी है फसल लहलहाने के लिए ....

उम्र का क्या है उम्र तो ढलती ही है

लेकिन प्यार की कोई उम्र नहीं होती ...





~ सूरज


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