नाम: सूरज राय "सूरज"
उम्र : जिस्मानी 56, दिल, मन लगभग 17 1/2 साल, और इतना ही रहेगा ।कार्य :डिफेंस अकाउंट में सीनियर ऑडिटर काम "ज़िंदगी भर उसे हम "जोड़ते-घटाते" हैं । लोग ज़ख़्मों मे "गुणा" करके "भाग" जाते हैं ।
कविता : शायरी कविता की कोई ग्रामर नहीं जानता और न ही सीखने की कभी कोशिश की । भावुक हूँ बीमारी की हद तक तो शायद वही लिखवा लेती है । मेरी शायरी की सच्चाई.. जब भी कोई भी पल मिला है मुझे ग़म लेकर । मैंने काग़ज़ को सब बता दिया कलम लेकर ।
सहभागिता :
सूरज राय सूरज ने दो किताबें लिखी हैं -
१. धुआँ धुआँ सूरज
२. मैं तुम्हारा चेहरा

नाम : सरोज सिंह “सूरज “
उम्र : ४६ साल ...लेकिन मन के किसी कोने में आज भी एक बच्ची बैठी हुई है ।
कार्य : प्राचार्य - महाराणा प्रताप
शहर : सतना
कविता : प्रकृति का साथ और एकांत बहुत पसंद है .... किताबें , संगीत , कलम और रंग-तूलिका सबसे अच्छे मित्र हैं । भीड़ में भी खोए खोए रहने की बुरी आदत भी है ..
सहभागिता :

नाम : सुधीर कुमार पाण्डेय “व्यथित “
उम्र : इस संसार मे लगभग पिछले 56 सालों से मुकम्मल मुकाम। मतलब उम्र लगभग अब तक छप्पन
कार्य : मध्यप्रदेश के बिजली महकमे में कार्य पालन अभियंता (सिविल) 35 साल
शहर :
कविता : कविता का जीवन में प्रवेश और तब से कविता से बेइंतहा प्यार दोस्ती... बहुत बाँटा है मुझे इस कविता ने .. ये लगातार कामयाब कोशिश भी करती रही कि बचा रहे भीतर का आदमी मुझमें .... सो कहता हूँ मैं कि जैसे है वैसे ही दिखें चलो कविता लिखें..|
सहभागिता :

नाम : आनंद खत्री "सूफी बेनाम"
उम्र : 45 साल,दिल की उम्र 75 साल
कार्य: वास्तुविदय , ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण, पावर-लिफ्टर, थिओसोफिस्ट
शहर : नोएडा
कविता :संक्षेप में - हम कवी हैं, कविता की हर विधी , हर रूप सीखने की लालसा रखते हैं । अगर कोई कुछ सीखाना चाहे तो हम हाज़िर हैं। तजुर्रबा चंद रिश्तों का है । हर दोस्त हर अपना हमें अपनी नज़र से देखता है और एक नजरिया मेरा भी है।
सहभागिता - एक उम्र लिखती थी मेरे दिन हर रोज़, सोचा क्यों न साथ लिख जाओ।

नाम : अनिता शर्मा “अनु”
उम्र : सदियाँ समेटे हूँ खुद में, आंकड़ों में कैसे माप पाओगे
कार्य : प्रयासरत हूँ औरों की आँखों में ख़ुशी और होंठों पर हंसी लाने के
शहर : जयपुर
कविता : मेरे लिए रूह की परतों में लिपटी गुमसुम सदा
सहभागिता : अलग - अलग धागे से जुलाहे की भांति बुनना
उम्र: 27 वर्ष
कार्य : अध्यापिका
शहर : नई दिल्ली
कविता:मैं लिखना नहीं जानती बस कलम जब हाथ में होती है मन में उमड़ घुमड़ रहे घने भाव कागज़ पर स्वतः बरस जाते हैं , भावुक व अंतर्मुखी होना मेरी कमजोरी है ।
नाम : फ़ारूख़ नदीम
उम्र : २५ साल
कार्य : वास्तुकला का छात्र हूँ
शहर : दिल्ली
कविता :
सहभागिता:

नाम : गुंजन अग्रवाल 'चारू
उम्र : ३४ साल
कार्य : गृहणी, रेकी मास्टर, पेंटिंग-आयल ऑन कैनवास
शहर : खुर्जा
कविता : मेरे लिये कविता माध्यम है अपने विचारों और भावों को प्रस्तुत करने का, जब लिखती हूँ तो ख्यालों को आज़ादी पूरी रहती है
शहर : खुर्जा
कविता : मेरे लिये कविता माध्यम है अपने विचारों और भावों को प्रस्तुत करने का, जब लिखती हूँ तो ख्यालों को आज़ादी पूरी रहती है
सह-भागिता : सह-भागिता में हम एक दूसरे के विचारों को समझ कर उसको एक -भाव में प्रस्तुत करते हैं
ज़मीं पर हूँ फलक सी मैं ,
कभी चंचल सबा सी मैं
ज़मीं पर हूँ फलक सी मैं ,
कभी चंचल सबा सी मैं
बन जाऊं आफ़ताब कभी,
कभी अधूरे महताब सी मैं.......
कभी अधूरे महताब सी मैं.......

नाम :मोहम्मद शब्बीर
उम्र : ३४ साल
कार्य :जे एस पी एल
शहर : रायगढ़
कविता :
सहभागिता: मैं सहभागी बन के सीखता हूँ

नाम :पूजा बंसल
उम्र : बचपना जाता नही और जवानी जाने नही देती मैं...!!
शहर :मेरठ
काम :क्लीनिकल साईकलोजिस्ट
कविता : मैं खुद गजल सी हूँ..!
सहभागिता : या तो सीख लो या सीखा दो ... !!:)

नाम : पूजा श्रीवास्तव “कनुप्रिया”
उम्र : है मेरी उम्र कुछ पलों की बस, एक पल में हज़ार सदियाँ हैं
कार्य : प्रबंधक- लोक सेवा केंद्र
शहर : बुदनी
कविता : मैं......
सहभागिता : मैं कहूँ तुम कहो चलो साथी, बात से बात कोई की जाए

नाम :राजेश सिक्का
उम्र : ४६ साल
कार्य :इंटीरियर डेकोरेटर
शहर : लखनऊ
कविता : पता नहीं था के दिल में है,आप सब के साथ से जुबां पे आ गयी
सहभागिता: आप लोगों के साथ मेरी ज़िन्दगी की पहली सहभागिता है,इससे पहले मैंने कभी कुछ नहीं लिखा

नाम : रिपुदमन मगोंन
उम्र : ४६ साल
कार्य : सॉफ्टवेयर डेवलपर
शहर : जयपुर
कविता :
सहभागिता: प्रतिक्रिया से कविता बनना मुश्किल है। सहभागिता पे मेहनत करनी होगी।
नाम : उत्कर्ष सिंह सोमवंशी
उम्र : 35 बसंत बीत गये
कार्य : तन्त्रांश अभियांत्रिक
शहर : बैंगलोर
कविता : स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा ! कवि जब भावनाओं की प्रसव से गुजरता है तो कविता प्रस्फुटित होती है
सहभागिता : संवेदना का अंतर्सेतु ,हमारी प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनभागिता ही सहभागिता !
उम्र : 35 बसंत बीत गये
कार्य : तन्त्रांश अभियांत्रिक
शहर : बैंगलोर
कविता : स्वान्तः सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा ! कवि जब भावनाओं की प्रसव से गुजरता है तो कविता प्रस्फुटित होती है
सहभागिता : संवेदना का अंतर्सेतु ,हमारी प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनभागिता ही सहभागिता !
नाम : विकास त्रिपाठी
उम्र : ४४ साल
शहर : बैंगलोर
कार्य : डायरेक्टर ( इनफार्मेशन सर्विसेस ग्रुप)
कविता : लखनऊ में मेरी पैदाइश हुई। हिंदी और उर्दू का साँझा परिचय हमेशा रहा। अहमद फ़राज़ , ग़ालिब, वसीम बरेलवी, गुलज़ार, खुमार बाराबंकी जैसे शायरों का ख्याल हमेशा साथ रहा
कविता : लखनऊ में मेरी पैदाइश हुई। हिंदी और उर्दू का साँझा परिचय हमेशा रहा। अहमद फ़राज़ , ग़ालिब, वसीम बरेलवी, गुलज़ार, खुमार बाराबंकी जैसे शायरों का ख्याल हमेशा साथ रहा
सह -भागिता: अपने अलावा किसी और के साथ पहली बार लिखा। ये ग्रुप बनाने का शुक्रिया। .
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